Sunday, 15 February 2026

मालपुआ खाकर/डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' की क्षणिकाएँ


वे 
दूध में पानी मिलाते हैं,
और फिर
दूध का दूध 
पानी का पानी 
चाहते हैं!

उत्कोच में डूबी व्यवस्था 
निकम्मों कों
कर्मठता का पर्याय 
बता रही है,
जनता 
अपने फ़ैसले पर
पछता रही है!

बड़ी उम्मीदों के साथ
जनता ने अपना
जनप्रतिनिधि चुना,
जनप्रतिनिधि
मालपुआ खाकर
उड़ता बना!

जो कभी क्लासरूम नहीं गये 
बच्चों का हक़ खा गये,
शिक्षक दिवस के अवसर पर 
वे भी पुरस्कार पा गये!

वह ताउम्र बॉस को 
रिश्वत देता रहा, 
बॉस उसे 
सहूलियत 
देता रहा!

© डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उ. प्र.) 
पिन कोड- 212601
मोबाइल- 9839942005
ईमेल- veershailesh@gmail.com