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Friday, 2 December 2022

लिखता हूँ जब प्रेम पर : डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' के दोहे

मौसम ने जादू किया, हुई अनोखी बात।
सूरज के 'मैसेज़' पढ़े, चंदा आधी रात।।

उनके मीठे बोल से, मिलता पल-पल क्षेम।
सावन के आग़ोश में, बढ़ता जाता प्रेम।।

वे शायद नाराज़ हैं, नहीं करेंगी 'रीड'।
ढूँढ़ रहे 'इनबॉक्स' में, 'मैसेज़' हैं 'अनरीड'।।

श्वास-श्वास निःश्वास-सी, शब्द-शब्द निःशब्द।
लिखता हूँ जब प्रेम पर, चुक जाते क्यों शब्द।।

बातें उसकी रसभरी, देतीं मिसरी घोल।
मन झंकृत हो नाचता, शब्द-शब्द अनमोल।।

सदियों से बेचैन हूँ, कब आओगे पास?
आज मही ने जब कहा, मौन हुआ आकाश।।

रचे-बसे जब प्रेम में, मुखर हुआ विश्वास।
धड़कन तब पी से कहे, आओ मेरे पास।।

दर्द बँटाती 'माँ' सदा, दर्द बँटाती 'हीर'।
नेह मिले ममता तले, घट जाती है पीर।।

© डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उ. प्र.) 
पिन कोड- 212601
मोबाइल- 9839942005
ईमेल- veershailesh@gmail.com

Sunday, 20 September 2020

रात चाँदनी ने लिखे : डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' के दोहे


अधरों पर मुस्कान थी, बाँहों में मनमीत।
रात चाँदनी ने लिखे, सदियों लम्बे गीत।।

अदा सुनहरी प्रेम की, चॉकलेट-सा टोन।
‘चल झूठे’ उसने कहा, काट दिया फिर फ़ोन।।

कैसे प्रिय से बात हो, व्यर्थ गये सब ‘वर्क’।
लाख कोशिशें कर चुकी, बैरी है ‘नेटवर्क’।।

रहे बदलते करवटें, जागे सारी रात।
पहले उनसे फ़ोन पर, हो जाती थी बात।।

महुआरे-से दो नयन, बाँते हैं शहतूत।
सरस प्रकृति का रूप वो, मैं वसंत का दूत।।

तुम मीरा तुम राधिके, तुम कान्हा की वेणु।
तन हूँ मैं तुम आत्मा, तुम बिन मैं, जस रेणु।।

मिले आज जब ‘बीच’ में, नैन हुए तब चार।
दिल मेरा बैंजो हुआ, मन हो गया गिटार।।

प्रियतम आओ हम रँगें, धरती से आकाश।
बोल रही है भावना, सच हो सकता काश।।

© डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
 18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उ. प्र.) 
पिन कोड- 212601
मोबाइल- 9839942005
ईमेल- veershailesh@gmail.com