Sunday, 21 December 2025

भीत में चुना गया/डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' के हाइकु

आपाधापी में
बार-बार बचा 'मैं'
खोये 'अपने'।
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ज्यों का त्यों 'राँझा'
बदल गयी 'हीर'
पीर ही पीर।
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बालू में ढेर
नहा कर निकले
कागजी शेर।
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मासूम चूहे
बिल्ली पर झपटे
जान के लाले।
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वक़्त ने कूटा
टक्कर पहाड़ से
पसीना छूटा।
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कौन अपना?
भीत में चुना गया
हर सपना।
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मिली है सीख
पर हो गया जब
लाख से लीख।
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© डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
सम्पर्क: 18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उ. प्र.)
पिनकोड: 212601
मोबाइल: 9839942005

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