लेकर चला
पीठ पर महल
भूख सबल।
जी तोड़ श्रम
फावड़े पर भारी
रोटी की धुन।
हाथ हथौड़ा
पीठ पर तनय
श्रम की देवी।
कर्म ही धर्म
साहस ही सौन्दर्य
श्रम-देवियाँ।
पेट की भूख
ईंट-भट्ठा ही घर
श्रम विकल्प।
भूख चाहत
खो गया बचपन
बने श्रमिक।
पीठ पर महल
भूख सबल।
जी तोड़ श्रम
फावड़े पर भारी
रोटी की धुन।
हाथ हथौड़ा
पीठ पर तनय
श्रम की देवी।
कर्म ही धर्म
साहस ही सौन्दर्य
श्रम-देवियाँ।
पेट की भूख
ईंट-भट्ठा ही घर
श्रम विकल्प।
भूख चाहत
खो गया बचपन
बने श्रमिक।
© डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उ. प्र.)
पिन कोड- 212601
मोबाइल- 9839942005




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