Monday, 7 October 2024

डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' लखनऊ में हुए सम्मानित

विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट तथा माधवी फाउण्डेशन ने डॉ. शैलेष को किया सम्मानित 


फतेहपुर। साहित्य सेवा ट्रस्ट, आगरा तथा माधवी फाउण्डेशन, लखनऊ के ‌ संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का‌ आयोजन राष्ट्रीय पुस्तक मेला सभागार, बलरामपुर गार्डन, लखनऊ में ‌ भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें ‌विद्वानों ने "साहित्य में प्रकृति चित्रण एवं पर्यावरण चेतना" पर विविध आयामों को‌ लेकर अपने वक्तव्य प्रस्तुत किये। इस अवसर पर फतेहपुर के चर्चित साहित्यकार एवं समीक्षक डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' बतौर विशिष्ट अतिथि और वक्ता उपस्थित रहे। उन्होंने "समकालीन दोहा काव्य में प्रकृति बोध एवं पर्यावरण चेतना" विषय पर अपने शोधपत्र के मुख्य अंश प्रस्तुत किये। उन्हें साहित्य भूषण डॉ. मिथिलेश दीक्षित एवं मंच पर उपस्थित अन्य गणमान्य द्वारा प्रतीक चिह्न, प्रशस्तिपत्र, अंगवस्त्र तथा कण्ठहार देकर सम्मानित किया गया। 


ज्ञात हो कि शैलेष जी हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में निरन्तर लिख रहे हैं। विभिन्न विधाओं में सृजन एवं सम्पादन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले वीर जी की रचनाएँ देश-विदेश के हिन्दी और अंग्रेज़ी के विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं, वेबसाइट्स, संकलनों तथा शोध-संकलनों में अनवरत् प्रकाशित होती रहती हैं। उनकी कविताओं का अनुवाद अनेक यूरोपीय एवं एशियाई भाषाओं में किया जा चुका है। उनकी रचनाओं का प्रसारण दुनिया के अनेक हिस्सों से हो चुका है। 


कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पद्मश्री ‌डॉ. विद्या बिन्दु सिंह थीं, जबकि प्रथम सत्र की अध्यक्षता अभिदेशक के‌‌ सम्पादक डॉ. ओंकार नाथ‌ द्विवेदी ने की तथा द्वितीय सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध सर्जक डा. विश्वम्भर शुक्ल ने की। इस अवसर पर कई पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ और देश के अन्य प्रान्तों से आमंत्रित साहित्यकार भी सम्मानित किये गये। संचालन प्रो. कल्पना ‌दुबे ‌तथा प्रो. सुभाषिणी शर्मा ने किया। आभार ज्ञापन माधवी फाउण्डेशन की ‌अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश‌‌ दीक्षित तथा ‌ विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. मोहन‌‌ मुरारी शर्मा ने किया।




सारस्वत अतिथि इन्दौर से पधारे विचार प्रवाह के अध्यक्ष मुकेश तिवारी थे। प्रथम सत्र में विशिष्ट अतिथि रायबरेली ‌से आये राम निवास पंथी‌ और‌ प्रो. आजेंदर प्रताप सिंह, यशवन्त सिंह चौहान, बरेली से आये ‌अनुकृति के सम्पादक डॉ. लवलेश दत्त थे। प्रथम सत्र का शुभारम्भ हाइकु मजूषा के डॉ. मिथिलेश दीक्षित की रचनाधर्मिता पर केन्द्रित विशेषांक के‌ लोकार्पण के साथ हुआ। हाइकु मञ्जूषा के सम्पादक ‌प्रदीप कुमार दाश 'दीपक' को दोनो संस्थाओं की‌ ओर से हाइकु गौरव सम्मान प्रदान ‌किया गया। नवरात्र में सम्पन्न होने वाले इस समारोह में शिक्षा,‌ साहित्य, मीडिया, समाज सेवा आदि ‌क्षेत्रों में विशिष्ट भूमिका निभाने ‌वाली‌ महिलाओं को सम्मानित किया गया।


Wednesday, 28 August 2024

दंग सिनेमाहाल था/डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' के दोहे

दंग सिनेमाहाल था, ख़ुद दोनो थे दंग।
पिया और के संग था, प्रिया और के संग।।

बढ़ी आँख की रोशनी, फूले पिचके गाल। 
बेटे ने परदेस से, पूछा माँ का हाल।।

बच्चों को रोटी मिले, नेह मनाये गेह।
जैसे फिरकी नाचती, नाच रही है देह।।

जब-जब जागी अस्मिता, तिनके बने पहाड़।
चूहों ने हड़ताल की, बिल्ली गयी तिहाड़।।

देह बिकाऊ ब्राण्ड है, देह गणित का जोड़।
विज्ञापन के दौर में, मची हुई है होड़।।

नये दौर में हो गये, मैले सभी चरित्र।
बेटे की जो मित्र थी, अब पापा की मित्र।।

वही प्रेम का आवरण, वही नीम की छाँव।
बहुत दिनों के बाद मैं, लौटा अपने गाँव।।

अम्बर में ऊँचे उड़ूँ, तो भी रहूँ कबीर।
पैरों तले ज़मीन हो, ज़िन्दा रहे ज़मीर।।

बैठ 'किचन' में आज फिर, आँसू रही उलीच।
अपनापन है ढूँढ़ती, घर-दफ़्तर के बीच।।

कलुष कहीं होगा नहीं, होगी केवल प्रीत।
लिखती रहना लेखनी, मानवता के गीत।।

सम्पर्क-
डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
(अध्यक्ष-अन्वेषी संस्था)
18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उ. प्र.) 
पिन कोड- 212601
मोबाइल- 9839942005
ईमेल- veershailesh@gmail.com

बुधिया फिर 'विक्रम' है/डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' की क्षणिकाएँ


उधर
उन्नति के शिखर पर
भावी पीढ़ियाँ हैं,
इधर दरक रही
संस्कारों की सीढ़ियाँ हैं!

वे
इनबॉक्स में कुछ और
ग्रुप में कुछ और
लिखते हैं,
ज़रूरत के मुताबिक़
कई चेहरों में
दिखते हैं! 

महापुरुषों का चरित्र
आजकल नेता
घटाते-बढ़ाते हैं,
चुनाव जीत जाते हैं!

रात ढल गयी
सुबह का
अपना पराक्रम है,
कुछ कर गुज़रने की
उम्मीद में
बुधिया
फिर 'विक्रम' है!

वह शब्दों की क़ीमत
नहीं जानता है,
प्रकाशन को महज
व्यवसाय मानता है!

हंगामा
जन्मसिद्ध 
अधिकार है,
जनता
लाचार है!

पंख लगे तो उड़ा
ठोकर लगी तो मुड़ा
उड़ने-मुड़ने में
कुछ नहीं बचा,
सब कुछ प्रकृति का रचा!

सम्पर्क-
डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
(अध्यक्ष-अन्वेषी संस्था)
18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उ. प्र.) 
पिन कोड- 212601
मोबाइल- 9839942005
ईमेल- veershailesh@gmail.com

Sunday, 21 July 2024

गुरु पूर्णिमा विशेष हाइकु : डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'


गुरु पूर्णिमा के पुनीत अवसर पर अपने शोध-गुरु कीर्तिशेष पुरातत्त्वविद् प्रो. एस. एन. मिश्र जी को विनयपूर्वक समर्पित कुछ हाइकु:-

जड़ से जीव
मूढ़ से मतिमान् 
गुरु महिमा।

उसने छुआ
धरती से आकाश
गुरु की कृपा।

जाग्रत हुए 
श्रद्धा और विवेक 
गुरु आशीष।

विस्मित जग
आदमी हुआ हीरा
गुरु का स्पर्श।

गगन छोटा
प्रतिभा के सम्मुख 
गुरु-सानिध्य।

-  डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उ. प्र.)
पिन कोड- 212601
ईमेल- veershailesh@gmail.com

Sunday, 28 April 2024

मत आना मधुसूदन अब तुम : डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'

कौन सुनेगा सुर बाँसुरिया,
बैंजो होगा तुम्हें बजाना।
जैक्सन का संसार दिवाना, 
मधुसूदन अब तुम मत आना।

यमुना तट सुनसान पड़ा है,
जुहू बीच अब जाना होगा। 
धूप सेंकती बालाओं से,
इंग्लिश में बतियाना होगा।

मोबाइल है स्टेटस सिम्बल,
मोर पंख का गया जमाना।
घर के आगे कार फ़रारी,
नहीं चलेगा गाय चराना।

स्पोकन इंग्लिश, कम्प्यूटर कोर्स 
जाने क्या-क्या करना होगा। 
टाइ-सूट में बन-ठन कर अब,
हाय-बाय भी करना होगा।

थोड़ा जिम भी जाना होगा,
ह्विस्की-रम भी पीना होगा। 
तेरे नाम की हेयर स्टाइल,
अपने सिर भी लाना होगा। 

माखन-दही चुराने जाना,
तो बस अपनी ख़ैर मनाना।
चिकनी चुपड़ी बातों में ये, 
आने वाला नहीं जमाना। 

माँ से कौन कहेगा चोरी,
अब पुलिसकेस बन जायेगा।
अगले हफ़्ते  ही पुलिसमैन,
घर सम्मन लेकर आयेगा। 

मानव बचे कहाँ कलयुग में,
कंसों से भू भरी पड़ी है।
एके-छप्पन, हाइड्रोजन बम,
क्रूज-मिसाइल बड़ी-बड़ी हैं।

रख कर चक्र-सुदर्शन आना,
वरना होगा मुँह की खाना।
हुआ पुनः यदि चीरहरण तो,
नित्य अदालत आना-जाना।

मत आना मधुसूदन अब तुम, 
नहीं रही वह बात पुरानी।
नेता काट रहे हैं चाँदी,
नहीं रहे अब राजा-रानी।

© डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उ. प्र.)
पिन कोड- 212601
मोबाइल- 9839942005
(रचना काल : 2003)

Wednesday, 17 April 2024

श्रीरामनवमी पर विशेष:- शुभ की जीत : डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर' के हाइकु


राम ने माना 
आदर्श ही जीवन 
हो गये राम।

बरसी कृपा 
मूढ़ को मिला मोक्ष 
राम की इच्छा।

दया के सिन्धु
राम से सुवासित 
प्रत्येक बिन्दु।

राम से प्रीत
अशुभ का विनाश 
शुभ की जीत।

राम ही राम
कण-कण में राम
सृष्टि के प्राण।

© डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
veershailesh@gmail.com

Sunday, 3 March 2024

यादें जूही हो जाती हैं : डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'

सम्बन्धों की परिभाषा तुम,
अपनेपन की अभिलाषा तुम।

जीवन का उपमान तुम्हीं हो,
तुम गुलाब की पंखुड़ियों-सी।
तुम अमर राग, तुम सुर-सरगम,
तुम हो दीपों की लड़ियों-सी।
बोलूँ क्या-क्या सजनी तुमको,
इस मूक हृदय की भाषा तुम।

मीलों दूर भले तुम आली,
यादें जूही हो जाती हैं।
साँसों में बसती हो ऐसे,
कितने फागुन बो जाती हो।
उर में आते जो भाव मृदुल,
उन भावों की प्रतिभाषा तुम।

© डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर'
18/17, राधा नगर, फतेहपुर (उ. प्र.) 
पिन कोड- 212601
वार्तासूत्र- 9839942005
ईमेल- veershailesh@gmail.com